127. हंस-हंस के जवां दिल के हम क्यों न चुनें टुकड़े
The tragedy queen, Meena Kumari, has composed some beautiful poetry.
Here's one I'm sharing.
आगाज तो होता है अंजाम नहीं होता
जब मेरी कहानी में वह नाम नहीं होता
जब जुल्फ़ की कालिख में गुम जाए कोई राही
बदनाम सही लेकिन गुमनाम नहीं होता
हंस-हंस के जवां दिल के हम क्यों न चुनें टुकड़े
हर शख्स की क़िस्मत में ईनाम नहीं होता
बहते हुए आंसू ने आंखों से कहा थम कर
जो मय से पिघल जाए वह जाम नहीं होता
दिन डूबे है या डूबी बारात लिए कश्ती
साहिल पे मगर कोई कोहराम नहीं होता